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Fungizide Mittel Es ist bekannt, Phenylsulfinsäure-vinylester (deutsche
Patentschrift 952 479) oder Phenylsulfinsäure-chlorvinylester (deutsche Auslegeschrift
1079 379) als fungizide Wirkstoffe zu verwenden. Sie haben jedoch nur eine
geringe Wirkung.
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Es wurde gefunden, daß Verbindungen der Formel Ar - OS02 - CH = CH2
in der Ar einen aromatischen Rest bedeutet, der durch einen oder mehrere Alkylreste,
von denen auch zwei benachbarte gemeinsam einen am aromatischen Rest angehefteten
Ring bilden können, oder einen oder mehrere Halogen-, Nitro-, Formyl-oder Rhodanreste
substituiert sein kann, eine sehr gute fungizide Wirkung haben.
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Die Verbindungen sind nach dem in der deutschen Auslegeschrift
1094 735 beschriebenen Verfahren durch Umsetzung von aromatischen Hydroxyverbindungen
mit Chloräthansulfochlorid im wäßrigen alkalischen Medium erhältlich.
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Beispielsweise werden folgende Verbindungen genannt Wirkstoff: CH2
= CH - 5020R.
| R # -(2> |
| Kp.o,x = 90 bis 91'C; Fp. = 40 bis 42'C; |
| nD = 1,5171 |
| -<C>- CH3 |
| Kp.7 = 143 bis 148°C; nm = 1,5226 |
| CH3 |
| / \ CH3 |
| Kp.o,5 = 128 bis 132°C |
| CH3 |
| CH3 |
| Kp.o,4 = 125 bis 130°C |
| CH3 |
| R= / \ C-CH3 |
| um |
| Kp.o,1 = 117 bis 119°C; nö = 1,5130 |
| / \ CgH17 |
| n' = 1,5105 |
| / \ C9H19 |
| nö = 1,5l15 |
| _CD- C12H25 |
| n' = 1,5055 |
| CH3 |
| -<b>- Cl |
| Kp.i = 153 bis 159°C; Fp. = 52 bis 53'C |
| CH3 |
| / \ Cl |
| Kp.o,2 = 115 bis 120°C |
| CH3 |
| cl |
| nD = 1,5370 |
| C1 |
| -#t> |
| Kp.o,2 = 110 bis 115°C; nD = 1,5212 |
| Cl |
| -c > |
| Kp.0,2 = 114 bis 118°C; n120 = 1 ,5515 |
| / \ cl |
| Kp.o,i bis 0,2 = 105 bis 110°C; n D = 1,5315 |
| cl |
| -<b>- cl |
| nö° = 1,5542 |
| cl |
| cl |
| Kp.o,2 = 122 bis 128°C |
| cl |
| / \ cl |
| cl |
| Kp.oa = 131 bis 133°C; Fp. = 46 bis 47°C; |
| n40 D cl = 1,5650 |
| / \ cl |
| cl |
| Kp.o,2 = 122 bis 128°C; Fp. = 65°C |
| cl cl |
| / \ cl |
| cl cl |
| Kp.o,2 = 190°C; Fp. = 93°C |
| Br |
| R = #b |
| Kp.o,E = 102 bis 105°C; n" = 1,5579 |
| Br |
| -<> Br |
| Br |
| Fp. = 81,5 bis 82,5°C |
| -C>- SCN |
| Fp. = 98 bis 101'C |
| CHO |
| -b |
| nD =l,5472 |
| -<D- NO2 |
| Fp. = 71 bis 72°C |
| cl |
| -<b>- NO2 |
| Fp. = 92 bis 93'C |
| cl |
| / \ NO2 |
| n' = 1,5775 |
| cl |
| / \ cl |
| NO2 |
| Fp. = 82 bis 83'C |
| CH3 |
| / \ CH3 |
| N02 |
| Fp. = 97°C |
| Cl NO2 |
| / \ cl |
| cl |
| Fp. = 108 bis 109°C |
| CH3 |
| R = / \ Cl |
| N02 |
| Fp. = 82°C |
| C1 |
| / \ N02 |
| Cl |
| Fp. = 87°C |
| CHO |
| -<b>- NO2 |
| n -o = 1,5845 |
| C(CH3)3 |
| / \ NO2 |
| N02 |
| Fp.=91°C |
| CH3 |
| NO2 |
| N02 |
| Fp. = 81'C |
| N02 |
| / \ N02 |
| Fp. = 132°C |
| N02 |
| / \ N02 |
| Fp. = 133°C |
| \ / |
| Fp. = 50 bis 53'C |
| R= \ I |
| I |
| Kp.ö,2 = 132 bis 136°C |
| / 0S02 - CH = CH2 |
| \ I F |
| Kp.o,3 bis o,4 = 118 bis 122°C; nö = 1,5084 |
| / 0S02 - CH = CH, |
| F \ I |
| Kp.o,2 bis 0,3 = 124 bis 126°C; nö = 1,5064 |
| J |
| / L OS02-CH=CH2 |
| J \ J |
| Fp. 112 bis 114'C |
Durch Vermischen der Wirkstoffe mit üblichen Verdünnungsmitteln oder Trägerstoffen,
z. B. Wasser, organischen Flüssigkeiten, Dispergier- oder Netzmitteln, festen inerten
Stoffen oder Mischungen dieser Stoffe erhält man die erfindungsgemäßen Mittel. Die
Zumischung von anderen Wirkstoffen, z. B. akariziden, insektiziden, oviziden, herbiziden,
fungiziden oder bakteriziden Wirkstoffen, ist möglich.
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Die Anwendung der erfindungsgemäßen Mittel erfolgt nach den üblichen
Methoden. Die vor dem Befall mit Pilzen zu schützenden Substanzen, z. B. Pflanzen,
Sämereien, Leder, Papier, Anstrichfarben, Verpackungsmaterialien oder Kunststoffdispersionen,
können mit den erfindungsgemäßen Mitteln in üblicher Weise, z. B. durch Bestäuben,
Bestreichen, Besprühen, Bestreuen, Einreiben oder Imprägnieren, behandelt werden.
Insbesondere die Anwendung als Aerosol ist für die erfindungsgemäßen Mittel geeignet.
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Ferner können die erfindungsgemäßen Mittel, beispielsweise in Lösungs-
oder Verdünnungsmitteln oder Dispergiermitteln gelöst.bzw. dispergiert, zum Schutz
des Holzes vor Pilzbefall verwendet werden. In ähnlicher Weise können sie zur Verhinderung
von schleimbildenden Mikroorganismen in der Papierindustrie eingesetzt werden. Die
neuen Wirkstoffe sind fettlöslich, und sie besitzen daher viele Anwendungsmöglichkeiten,
die fettunlösliche Fungizide nicht haben.
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Die folgenden Beispiele beweisen die überlegene fungizide Wirksamkeit
der erfindungsgemäßen Mittel gegenüber bekannten Mitteln.
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Beispiel 1 Feingemahlene Mischungen von Talkum mit verschiedenen Mengen
des jeweiligen Wirkstoffes
der in der Tabelle angegebenen Zusammensetzung.
wurden unter Zusatz von Pilzsporen (Aspergillus niger) auf die Oberfläche von Nähragar
gestäubt, wobei auf je 1 cm2 Oberfläche des Agars 17 mg des jeweiligen Wirkstoff-Talkum-Sporengemisches
aufgestäubt wurden. Der infizierte Agar wurde 5 Tage bei 35°C bebrütet und anschließend
das Pilzwachstum ermittelt. In der folgenden Tabelle sind die Ergebnisse dieses
Versuches dargestellt.
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1 = kein Pilzwachstum.
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2 = geringes Pilzwachstum. 3 = mittleres Pilzwachstum. 4 = starkes
Pilzwachstum. 5 = Pilzdecke geschlossen.
| Wirkung gegenüber Aspergillus niger |
| Wirkstoff Wirkstoffgehalt der Tallcummischung in |
| CH2 = CH - S020R 0,01 0,019 0,038 0,075 0,15 0,31
0,63 1,25 2,5 5,0 |
| R= / \ 5 5 3 1 1 1 1 1 1 1 |
| / \ 4 1 1 1 I 1 1 1 1 1 |
| C1 |
| / \ CH3 5 4 3 1 1 1 1 1 1 1 |
| CH3 |
| / \ C-CH3 5 5 4 4 1 1 1 1 1 1 |
| CH3 |
| 5 5 5 4 1 1 1 1 1 1 |
| H |
| - 5 4 4 1 1 1 1 1 1 1 |
| Vergleichssubstanzen |
| Pentachlorphenol..................... 5 5 5 5 5 1 1 1 1 1 |
| 3,5-Dimethyltetra-hydro-1,3,5-thiadiazin- |
| 2-thion ............. . .............. 5 5 5 5 1 1 1
1 1 1 |
| 1-Nitro-3,5-rhodanbenzol.............. 5 5 5 5 5 2 1 1 1 1 |
| Zink-dimethyldithiocarbamat .......... 5 5 5 5 5 5 4 3 1 1 |
| Tetramethylthiuramdisulfid ........... 5 5 5 5 5 5 3 2 2 2 |
| Mangan-äthylen-bis-dithiocarbamat ..... 5 5 ( 5 5 3
1 1 1 1 1 |
Beispiel 2 In der folgenden Tabelle sind die Hemmungswerte gegenüber dem Pilz Aspergillus
niger angeführt. Die Nährlösungen wurden mit dem Wirkstoff gemischt und anschließend
beimpft und 120 Stunden lang bei 36°C bebrütet. Danach wurde das Ausmaß des Pilzwachstums
beurteilt.
| Wirkstoffrnenge in der Nährlösung in Teilen Wirkstoff |
| Wirkstoff pro Million Teile Nährlösung |
| CH2 = CH - S020R 100 75 50 25 . 10 5 . 1 |
| R- CH3 0 0 0 0 0 1 2 |
| CH3 |
| -<b>- CH3 0 0 0 0 0 1 2 |
| CH3 |
| 0 0 0 0 1 1 2 |
| CH3 |
| CsH17 0 0 0 1 1 1 2 |
| C9H19 0 0 0 0 0 1 ' 1 |
| C12H25 1 1 1 1 1 1 3 |
| CH3 |
| -<b>- Cl 0 0 0 0 0 0 1 |
| CH3 |
| Cl 0 0 0 0 0 1 2 |
| CH3 |
| D 0 0 0 0 0 1 1 |
| C1 |
| Cl 0 0 0 0 0 0 1 |
| C1 |
| -<b- Cl 0 0 0 0 0 0 2 |
| C1 |
| 0 0 0 0 0 0 2 |
| C1 |
| Cl |
| -#> Cl 0 0 0 0 0 2 3 |
| C1 |
| Fortsetzung |
| Wirkstoff Wirkstoffmenge in der Nährlösung in Teilen Wirkstoff |
| Wirkstoff pro Million Teile Nährlösung |
| CH2 = CH - SfR 100 75 50 25 10 5 1 |
| Cl |
| R= / \ CI 0 0 0 0 0 1 2 |
| Cl |
| Cl Cl |
| e-\ C1 0 0 0 0 1 1 2 |
| C1 Cl |
| Br |
| / \ 0 0 0 0 0 1 1 |
| Br |
| / \ Br 0 0 0 1 1 1 2 |
| Br |
| -<D- SCN 1 1 1 1 1 1 2 |
| CHO |
| / \ 0 I I 2 2 2 2 |
| -<C>- N02 0 0 0 0 0 0 2 |
| Cl |
| -<b>- N02 0 0 0 0 0 1 2 |
| Cl |
| / \ N02 0 0 0 0 0 1 1 |
| CH3 |
| / \ CH3 0 0 0 0 0 1 1 |
| N02 |
| Cl N02 |
| / \ Cl 0 1 1 1 2 2 3 |
| C.'1 |
| Fortsetzung |
| Wirkstoffmenge in der Nährlösung in Teilen Wirkstoff |
| Wirkstoff pro Million Teile Nährlösung |
| CH2 = CH - SO2OR 100 75 50 25 10 5 1 |
| Cl - |
| R= |
| Cl 0 0 0 0 1 2 3 |
| N02 |
| CH3 |
| D- Cl 0 0 0 0 1 1 1 |
| N02 |
| CHO |
| N02 1 1 1 2 2 2 2 |
| OS02-CH=CH2 0 - 0 , 0 0 0 0 |
| F |
| 0 -S02-CH=CH2 0 - 0 0 0 0 1 |
| F .. |
| J |
| OS02 - CH = CH2 0 - 0 0 0 0 2 |
| J \ @ J |
| Wirkstoffmenge in der Nährlösung in Teilen Wirkstoff |
| Wirkstoff pro Million Teile Nährlösung |
| 100 75 50 25 10 5 1 |
| Vergleichssubstanzen |
| Wirkstoffe gemäß deutscher Patentschrift 952 479 |
| S02 - CH = CH2 0 1 1 3 3 3 5 |
| S02 - CH2 - CH2 - Cl 1 1 2 3 3 3 3 |
| S02 - CH2 - CH2 - Cl 1 1 1 3 3 3 3 |
| CH3 |
| SO2 -CH=CH2 0 1 1 2 3 3 3 |
| CH3 |
| lp- S02-CH2-CH2-Cl 1 1 2 3 3 3 3 |
| CH3 |
| Fortsetzung |
| Wirkstoffmenge in der Nährlösung in Teilen Wirkstoff |
| Wirkstoff pro Million Teile Nährlösung |
| i |
| 100 75 50 25 10 5 1 |
| S02-CH=CH2 0 1 1 2 2 3 3 |
| CH3 |
| CH3 SO2 - CH2 - CH2 - Cl 1 1 1 2 3 3 3 |
| CH3 S02 - CH = CH, 0 0 0 1 2 3 3 |
| CH3 |
| CH3-C SO2 -CH2-CH2-Cl 2 2 2 3 3 3 4 |
| CH3 |
| CH3 |
| CH3-C --#i> SO2 -CH=CH2 0 0 I 2 2 3 4 |
| CH3 |
| CH3 |
| CH3 - C S02 - CH2 - CH2 - Cl 3 3 3 3 4 4 4 |
| CH3 CH3 |
| CH3 |
| CH3-C SO#2-CH=CH2 0 0 1 2 3 3 5 |
| i |
| C Ha CH3 |
| Wirkstoff gemäß |
| deutscher Auslegeschrift 1079 379 |
| SO2 -CCI=CH-Cl 0 0 0 2 4 5 5 |
In der Tabelle bedeutet: 0 = kein Pilzwachstum. abgestuft bis 5 = ungehemmtes Pilzwachstum.