गोपी – प्रेम श्रीकृष्ण की रुपमाधुरी (पोस्ट 4) ------ भगवान् की उस रुपमाधुरी का वर्णन कौन कर सकता है ? वे एक बार जिसकी ओर प्रेम की नजर से देख लेते; उसी पर प्रेमसुधा बरसाकर उसे अमर कर देते, उसकी सारी विषयासक्ति को नष्ट कर अपना प्रेमी बना लेते |
‘रे चित ! तेरे हित के लिए तुझे सावधान किये देता हूँ | कहीं तू उस वृन्दावन में गाय चराने वाले, नवीन नील मेघ के समान कान्तिवाले छैल को अपना बन्धु न बना लेना, वह सौन्दर्यरूप अमृत बरसाने वाली अपनी मन्द मुस्कान से तुझे मोहित करके तेरे प्रिय समस्त विषयों को...