यह एक बाप और बेटे के उस रिश्ते को प्रस्तुत करता है जो आमतौर पर हर घर में देखने को मिल जाता है बाप अपने घर में अपने पुत्र को कुछ भी कहे, कितना भी डांटे लेकिन उसके जिगर के टुकड़े को कोई बाहरी ... सभी पढ़ेंयह एक बाप और बेटे के उस रिश्ते को प्रस्तुत करता है जो आमतौर पर हर घर में देखने को मिल जाता है बाप अपने घर में अपने पुत्र को कुछ भी कहे, कितना भी डांटे लेकिन उसके जिगर के टुकड़े को कोई बाहरी व्यक्ति एक लफ्ज़ भी बोले तो वह बर्दाश्त नहीं करतायह एक बाप और बेटे के उस रिश्ते को प्रस्तुत करता है जो आमतौर पर हर घर में देखने को मिल जाता है बाप अपने घर में अपने पुत्र को कुछ भी कहे, कितना भी डांटे लेकिन उसके जिगर के टुकड़े को कोई बाहरी व्यक्ति एक लफ्ज़ भी बोले तो वह बर्दाश्त नहीं करता